Friday, March 6, 2026
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आजाद वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसाइटी ने नाटक फंदी का किया मंचन…

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लखनऊ, 29 अगस्त:- संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के सहयोग से आज़ाद वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा नाटक फन्दी का मंचन रकाबगंज स्थित न्यू ऐज मोंटेसरी स्कूल में किया गया। इस कहानी में मानव जीवन के उस मर्म को स्पर्श करने की चेष्टा की है इसके पात्र फन्दी जो एक ट्रक ड्राइवर है जिसके पिता कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से ग्रस्त होता है।जिसके इलाज के लिए फन्दी और उसकी पत्नी हर संभव प्रयास करते हैं।जिस कारण फन्दी की नौकरी छूट जाती है और उसे ब्याज पर पैसे लेने पड़ते है। उसके ऊपर एक तरफ क़र्ज़ का बोझ दूसरी उसकी नौकरी का छूटना और लेनदारों का सरे बाज़ार उसे रुपयों के लिए बेइज़्ज़त किया जाना यही वजह है कि वो अंदर ही अंदर टूट जाता है। नौबत यहां तक आ जाती है कि घर में कुछ खाने को भी नहीं बचता‌।
नाटक के लेखक डॉ.शंकर शेष ने फन्दी के बारे में बताते हुए कहा कि क्या कानून व्यवस्था का सम्बन्ध बहरी व्यवस्था से है?
क्या कानून का मनुष्य की भीतरी व्यवस्था से सम्बन्ध नहीं है?
कानून मनुष्य के लिए बना है या मनुष्य कानून के लिए, कानून का जन्म हुआ है मनुष्य को अन्याय,अत्याचार और तकलीफों से छुटकारा देने के लिए और इसलिए कानून हमेशा नई चुनौतियों को स्वीकार करता है।कानून यदि स्थिर और पत्तर की तरह जड़ हो जायेगा तो वह समाज की बदलती हुई परिस्थितियों में न्याय नहीं दे सकता। इसलिए अदालतों में कानून की नई व्याख्या को हमेशा जन्म मिलता है। फन्दी का मुक़दमा भी ऐसी ही एक चुनौती है एक नई शुरुवात करती करती है। एक नई व्याख्या की, कैंसर का कोई इलाज नहीं है विज्ञान भी असहाय है। रोगी यातना से तड़प रहा है और रोगी के दोस्त और रिश्तेदार भी दुखी होते हैं।
रोगी जानता है कि उसकी मृत्यु निश्चित है सिर्फ उसे दुःख और पीड़ा का समय काटना है सब चाहते हैं कि रोगी को छुटकारा दे दिया जाये। तो ऐसे में कानून क्यों असहाय अवस्था में खड़ा है क्यों मनुष्य को असहनीय पीड़ा से छुटकारा पाने की सुविधा नहीं देता।
डाॅ.शंकर शेष ने कहा कि आज हम और आप मिलकर कुछ ऐसे ही सवालों का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश की है। नाटक के बारे में आगे बताया कि ये जेल का भीतरी हिस्सा है,दाहिनी ओर बाहरी हिस्सा है जहाँ से लोग मुल्ज़िम से लोग मिलने के लिए आते हैं। यहाँ लोग अपनी बातें करते हैं और घर का बना हुआ खाना देते हैं। इस जगह का नाम जेल का कंसल्टेशन रूम हैं। नाटक में अमन, अर्चित चाँद, मोहम्मद फ़ुजैल ने अहम् भूमिका निभाई। नाटक का सह-निर्देशन मोहम्मद फ़ुजैल एवं निर्देशन एम.के. अख्तर ने किया।

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